डीएमएफ मद से बनी पुलिया हुई क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग
पहली ही बारिश में बहने लगी 25 लाख की पुलिया, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

पहली ही बारिश में बहने लगी 25 लाख की पुलिया, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

डीएमएफ मद से बनी पुलिया हुई क्षतिग्रस्त, ग्रामीणों ने तकनीकी जांच और दोषियों पर कार्रवाई की उठाई मांग
Riporter Anchal Tiwari singrouli
सिंगरौली/देवसर, 4 अगस्त 2026। जनपद पंचायत देवसर अंतर्गत ग्राम पंचायत बूढ़ाडाड़ में डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान) मद से लगभग 25 लाख रुपये की लागत से निर्मित पुलिया पहली ही बारिश की मार नहीं झेल सकी। सेमरा नदी पर बनी इस पुलिया के दोनों किनारों पर भारी कटाव होने और संरचना के क्षतिग्रस्त होने से निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है और वे पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार आदिवासी एवं हरिजन बस्ती के लोगों की आवाजाही सुगम बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2026 में इस पुलिया का निर्माण ग्राम पंचायत बूढ़ाडाड़ द्वारा डीएमएफ मद से कराया गया था। लेकिन पहली ही बरसात में पुलिया के दोनों ओर मिट्टी का कटाव होने और संरचना को नुकसान पहुंचने से ग्रामीणों ने निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप किया गया होता, तो पुलिया पहली ही बारिश में इस तरह क्षतिग्रस्त नहीं होती। उनका आरोप है कि निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया, जिससे लाखों रुपये की सरकारी राशि के उपयोग पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है।
उल्लेखनीय है कि देवसर क्षेत्र में हाल के दिनों में कई चेक डैम और पुलियों के बारिश के दौरान क्षतिग्रस्त होने की घटनाएं सामने आई हैं। इससे विकास कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी को लेकर लोगों में चिंता बढ़ी है। स्थानीय नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं कि क्या निर्माण कार्यों का समय पर गुणवत्ता परीक्षण किया गया था और यदि अनियमितता हुई है तो इसकी जवाबदेही किसकी तय होगी।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से पुलिया की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने, गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट सार्वजनिक करने तथा जांच में किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
नोट: निर्माण में अनियमितता एवं गुणवत्ता संबंधी आरोप स्थानीय ग्रामीणों द्वारा लगाए गए हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभाग की जांच के बाद ही हो सकेगी।



