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जयंत-निगाही क्षेत्र में तेजी से बढ़ीं अवैध बस्तियां, कार्रवाई के बाद मिलीभगत और संरक्षण पर उठे सवाल

जयंत-निगाही क्षेत्र में तेजी से बढ़ीं अवैध बस्तियां, कार्रवाई के बाद मिलीभगत और संरक्षण पर उठे सवाल

सिंगरौली संवाददाता 

सिंगरौली जिले में एनसीएल की भूमि पर बढ़ते अतिक्रमण का मामला अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। जयंत से लेकर निगाही परियोजना क्षेत्र तक बड़े पैमाने पर सरकारी और कंपनी की जमीनों पर कब्जा कर अवैध बस्तियां बसाने के आरोप सामने आ रहे हैं। हालात यह हैं कि यह मुद्दा अब गांवों से लेकर शहर के चौक-चौराहों तक चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार, जिन क्षेत्रों में पहले घने पेड़-पौधे, वनभूमि और प्राकृतिक वातावरण था, वहां अब तेजी से पेड़ों की कटाई कर रातों-रात झोपड़ियां, मकान और अस्थायी निर्माण खड़े किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ समय में कई स्थानों पर अचानक बस्तियां विकसित हो गई हैं, जिससे भूमि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।मिलीभगत की चर्चा, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं

क्षेत्र में चर्चा है कि इस पूरे खेल में कुछ प्रभावशाली स्थानीय लोगों, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े व्यक्तियों और कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। हालांकि, अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके, लगातार बढ़ते अतिक्रमण ने निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह बताई जा रही है कि कई अवैध निर्माणों और बस्तियों पर अलग-अलग राजनीतिक दलों के झंडे लगे देखे गए हैं। इसके बाद राजनीतिक संरक्षण की चर्चाएं तेज हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो इतनी बड़ी संख्या में कब्जे संभव नहीं थे।बाहरी लोगों की बसाहट पर सवाल इन बस्तियों में रहने वाले लोगों की पहचान और मूल निवास को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि बड़ी संख्या में बाहरी लोग यहां आकर बस गए हैं, जिससे क्षेत्र की सुरक्षा, कानून व्यवस्था और भविष्य की सामाजिक स्थिति को लेकर चिंता बढ़ रही है।

एनसीएल ने शुरू की कार्रवाई, कार्रवाई के बाद बढ़ा तनाव मामले को गंभीरता से लेते हुए एनसीएल प्रबंधन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की है। बताया जा रहा है कि महाप्रबंधक के निर्देश पर कुछ स्थानों पर अवैध निर्माणों को ध्वस्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान बनाए गए वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें बुलडोजर से कब्जे हटाए जाते दिखाई दे रहे हैं। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद मामला और गरमा गया। कुछ जनप्रतिनिधि प्रभावित लोगों को लेकर पुलिस चौकी पहुंचे, जहां प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी और हंगामा हुआ। अधिकारियों पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगाए गए।

कई बड़े सवाल खड़े

इस पूरे घटनाक्रम ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं— आखिर कंपनी की जमीनों पर लगातार कब्जे कैसे होते रहे? निगरानी तंत्र क्या कर रहा था? क्या राजनीतिक संरक्षण के कारण कार्रवाई देर से हुई? बाहरी लोगों की बसाहट की जांच कौन करेगा?

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