कागजों में स्कूल, हकीकत में लूट का अड्डा! बिना व्यवस्था मान्यता—बरगवां केप्राइवेट स्कूलों की जांच की हुई मांग तेज
सिंगरौली– चितरंगी उपखंड में जिस सख्ती से निजी स्कूलों की जांच हो रही है, उसी तर्ज पर अब बरगवां के स्कूलों की भी जांच की मांग तेज हो गई है। वजह साफ है—यहां शिक्षा के नाम पर खुली लूट और फर्जीवाड़ा चरम पर है।
बरगवां के कई निजी स्कूल CBSE का नाम लेकर मोटी फीस वसूल रहे हैं लेकिन हकीकत में न तो उनके पास बुनियादी सुविधाएं हैं, न ही शिक्षा का स्तर किसी मानक पर खरा उतरता है। हालात इतने खराब हैं कि कई स्कूलों में न ठीक से प्लेग्राउंड है, न लैब की व्यवस्था, फिर भी धड़ल्ले से मान्यता लेकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बिना मैदान, बिना प्रयोगशाला और बिना जरूरी संसाधनों के इन स्कूलों को मान्यता कैसे मिल गई?
इस पूरे खेल में एक और बड़ा मुद्दा है हर साल वसूली जाने वाली री-एडमिशन फीस अभिभावकों का सीधा सवाल है कि जब बच्चा पहले से उसी स्कूल में पढ़ रहा है, तो हर साल “दोबारा एडमिशन” के नाम पर हजारों रुपये क्यों वसूले जा रहे हैं?
सिर्फ यही नहीं, *डेवलपमेंट फीस, एक्टिविटी चार्ज और अन्य मनमाने शुल्क* के जरिए अभिभावकों की जेब पर लगातार बोझ डाला जा रहा है। शिक्षा अब सेवा नहीं, बल्कि खुला “कमाई का धंधा” बन चुकी है।
अभिभावकों का आरोप है कि बरगवां के ये स्कूल अब पूरी तरह एजुकेशन माफिया में तब्दील हो चुके हैं, जहां नियम-कानून को ताक पर रखकर खुलेआम लूट मचाई जा रही है और जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने हुए हैं।
अब मांग साफ है
बरगवां के सभी निजी स्कूलों की तत्काल उच्च स्तरीय जांच हो बिना प्लेग्राउंड और लैब वाले स्कूलों की मान्यता रद्द की जाए
री-एडमिशन फीस और फर्जी शुल्कों पर सख्त रोक लगे * दोषी स्कूलों पर कड़ी कार्रवाई हो
अगर अब भी कार्रवाई नहीं हुई, तो यह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि इस “शिक्षा लूट तंत्र” को खुला संरक्षण माना जाएगा।












