शिक्षा का मंदिर या काल का मुख….?
अधूरे कागज़ों पर दौड़ रही स्कूल बसें, बच्चों की ज़िंदगी दांव पर
शिक्षा का मंदिर या काल का मुख….?
अधूरे कागज़ों पर दौड़ रही स्कूल बसें, बच्चों की ज़िंदगी दांव पर…
संवादाता सिंगरौली
सिंगरौली (बरगवां)। जिले में एक ओर यातायात नियमों का पालन कराने के लिए लगातार नियम चलाए जा रहे तो वही दूसरी तरफ स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर बड़ी लापरवाही सामने आई है। जहां जिला मुख्यालय से लगभग 25 किलोमीटर दूर बरगवां स्थित सांदीपनि सी.एम. राइज स्कूल में बच्चों को लाने–ले जाने के लिए जो वाहन लगाए गए हैं, कुछ गाड़ियां नंबर प्लेट, बिना फिटनेस और अधूरे कागजों के सहारे सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, परिवहन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए ये गाड़ियां बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रही हैं।
जहां नियमों के अनुसार स्कूली वाहन पीले रंग में होना चाहिए और उसमें तय सीटों से ज़्यादा बच्चों को बैठाने की अनुमति नहीं होती। लेकिन हकीकत में इस स्कूल की गाड़ियां अलग-अलग रंगों की हैं और उनमें सीट क्षमता से कहीं अधिक बच्चे ठूंसकर बैठाए जा रहे हैं। ऐसी स्थिति में कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों में इस बात की भी चर्चा है कि परिवहन विभाग और वाहन मालिकों की मिलीभगत के चलते यह अवैध परिवहन लगातार जारी है। यदि विभाग सक्रियता दिखाता तो बिना कागज़ों वाली और ओवरलोड गाड़ियां सड़कों पर नहीं दौड़ पातीं।
यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे मोटर मालिक और स्कूल प्राचार्य
जहां एक और लगातार कार्यवाहियां करते हुए यातायात नियमों का पालन करने की समझाइए दी जा रही है तो वहीं दूसरी ओर स्कूल के प्राचार्य और मोटर मालिक के मिली भगत से बच्चों की जिंदगियों को दांव पर लगाया जा रहा है जिसमें बच्चे स्कूल बसों में लटक कर जाते दिखाई दे रहे हैं ऐसे में कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है
बच्चों की जिंदगियों पर मंडरा रहा खतरा
स्कूल बसों में जिस तरह से बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जा रहा है, उससे अभिभावकों में भी चिंता बढ़ रही है। ज़रा सी लापरवाही बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। लेकिन जिम्मेदार इस पर कोई ठोस कदम उठाने का नहीं के रहे नाम
ज्यादा बच्चों को ले जाने का है परमिशन….?
खबर चलने के बाद स्कूल के कुछ शिक्षकों का कहना है कि ज्यादा बच्चों को ले जाने का है ऊपर से है परमिशन इसके पीछे की सच्चाई की पुष्टि हम नहीं करते बनी जांच का विषय
अब देखना यह होगा आखिर इन सभी मामलों में परिवहन विभाग की ओर से और जिले के जिम्मेदार अधिकारियों की और से क्या कुछ कार्यवाही होती हैं….?













