विधायक रामनिवास शाह का पत्र फाइलों में फॉक रही धूल, क्रेशर माफिया बेखौफ..?

सिंगरौली में जनहित के पत्र भी बेअसर..
विधायक रामनिवास शाह का पत्र फाइलों में फॉक रही धूल, क्रेशर माफिया बेखौफ..?
सिंगरौली जिले को औद्योगिक नगरी सिंगरौली में खनन और क्रेशर प्लांटों की मनमानी कोई नई बात नहीं है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अब जनप्रतिनिधियों के जनहित में लिखे गए पत्र भी प्रशासनिक फाइलों में धूल फांकते नजर आ रहे हैं। सिंगरौली विधायक रामनिवास शाह द्वारा 09 अक्टूबर 2024 को लिखा गया एक महत्वपूर्ण पत्र आज तक किसी ठोस कार्रवाई का इंतजार कर रहा है। विधायक रामनिवास शाह ने अपने आधिकारिक लेटर पैड पर जिले में संचालित क्रेशर प्लांटों द्वारा मानकों के विपरीत कार्य, चारागाह (गोचर) भूमि पर अवैध कब्जा, और जनता को हो रही परेशानियों का स्पष्ट उल्लेख करते हुए जांच और कार्रवाई की मांग की थी। लेकिन लगभग एक साल दो महीने से अधिक का समय बीत जाने के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
गोचर भूमि पर अवैध खनन का गंभीर आरोप विधायक द्वारा लिखे गए पत्र में उल्लेख है किग्राम करामी, तहसील माड़ा, जिला सिंगरौली की खसरा क्रमांक 122/3 कुल रकबा 4.00 हेक्टेयर भूमि पूर्व से ही चारागाह (गोचर) घोषित है। बताया जाता है कि कलेक्टर सिंगरौली द्वारा दिनांक 30.11.2017 को पारित आदेश में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया था कि इस भूमि पर किसी भी प्रकार का पत्थर उत्खनन पट्टा जारी नहीं किया जाएगा।
इसके बावजूद, दिनांक 27.01.2022 को यह पट्टा पहले मनरेगा मजदूर श्रीमती रीना देवी कोल के नाम से जारी किया गया और बाद में 06.08.2024 को इसे सारिका अलावा के नाम ट्रांसफर कर दिया गया। आरोप है कि यह पूरा मामला ग्राम सभा की सहमति के बिना, ग्राम पंचायत करामी और जनपद पंचायत बैढ़न को दरकिनार कर स्वीकृत कराया गया।
वर्तमान में इस भूमि पर आर.एस.आई. स्टोन वर्ल्ड प्रा. लि. द्वारा पशराज जादोन, वीरेन्द्र सिंह जादोन एवं रत्ना जादौन के माध्यम से खनन कार्य किया जा रहा है, जो पूरी तरह नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।
1000 से अधिक हरे-भरे पेड़ों और आबादी पर खतरा..?
विधायक के पत्र में यह भी उल्लेख है कि खदान के चारों ओर पुस्तैनी आबादी स्थित है और लगभग 1000 से अधिक हरे-भरे पेड़ मौजूद हैं। ऐसे में लगातार हो रहा खनन न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहा है, बल्कि स्थानीय लोगों के जीवन और मवेशियों के लिए भी गंभीर खतरा बन चुका है।
प्रशासनिक चुप्पी पर उठे सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विधायक स्वयं जांच की मांग कर रहे हैं, तो फिर जिला प्रशासन और खनिज विभाग की चुप्पी क्यों? आम नागरिकों द्वारा थानों से लेकर कलेक्टर कार्यालय तक दिए गए दर्जनों आवेदनों पर भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है। जहां इन सभी मामलों पर मौखिक रूप से बत किया गया तो खनिज विभाग अधिकारी आकांक्षा पटेल का कहना है कि “सभी क्रेशर संचालक लीगल हैं और नियमों के अनुसार ही काम कर रहे हैं।”
लेकिन यदि सब कुछ नियमों के अनुसार है, तो फिर विधायक को इस प्रकार पत्र लिखने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या विधायक को सही जानकारी नहीं दी गई, या फिर विभाग वास्तविक स्थिति को छिपा रहा है यह बड़ा सवाल बना हुआ है। बताया जाता है कि 100 से अधिक खदानें, आधी से ज्यादा भयावह स्थिति में खनिज विभाग के आंकड़ों के अनुसार सिंगरौली जिले में वर्तमान में 100 से अधिक खदानों से पत्थर का उत्खनन हो रहा है। इनमें से लगभग 50 फीसदी खदानें अंधाधुंध खनन के कारण बेहद खतरनाक स्थिति में पहुंच चुकी हैं। स्थिति यह है कि खदानें कुएं से भी अधिक गहरी हो चुकी हैं
वाहनों के निकलने के लिए सुरक्षित रास्ते नहीं मिट्टी के ढेर लगाकर अस्थायी रास्ते बनाए गए हैं,चालक जान जोखिम में डालकर काम कर रहे हैं
सुरक्षा मानक सिर्फ कागज़ों में,
खनिज विभाग की गाइडलाइन के अनुसार खदान के चारों ओर तार फेंसिंग अनिवार्य,मुख्य सड़क से कम से कम 100 मीटर की दूरी,खनन कार्य स्टेप बाय स्टेप किया जाना चाहिए,लेकिन जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। मकरोहर सहित कई इलाकों में खदानें मुख्य सड़क से कुछ ही मीटर की दूरी पर संचालित हैं। कहीं भी तार फेंसिंग नहीं है। कई खदानों को उत्खनन के बाद खुले गड्ढों के रूप में छोड़ दिया गया है, जो ग्रामीणों और मवेशियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
प्रदूषण और प्रशासन की बेरुखी
एक ओर सिंगरौली देश के कई बिजलीघरों को ऊर्जा देता है और हर साल शासन को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व देता है, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण और अवैध खनन के मुद्दे पर जिम्मेदार अधिकारी मौन साधे बैठे हैं।
अब सवाल यह है…क्या विधायक के पत्र पर कभी कार्रवाई होगी? क्या गोचर भूमि पर हो रहे खनन की निष्पक्ष जांच होगी? या फिर ये मामले भी अन्य शिकायतों की तरह फाइलों में दबकर रह जाएंगे?
फिलहाल, सिंगरौली की जनता इन सवालों के जवाब का इंतजार कर रही है।













