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ज़िले की क्रेशर खदानों में मनमानी खनन, सुरक्षा मानक सिर्फ़ कागज़ पर ?

जिले में 100 से अधिक खदानों से निकल रहा पत्थर

ज़िले की क्रेशर खदानों में मनमानी खनन, सुरक्षा मानक सिर्फ़ कागज़ पर ?

औद्योगिक नगरी सिंगरौली में बड़े पैमाने पर खनन संबंधी कार्यों को किया जाता है क्षेत्र में कोयला खदानों के साथ-साथ क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में कई क्रशर प्लांट सालों से संचालित हो रहे हैं क्रशर प्लांट को संचालित करने के लिए खनिज विभाग के द्वारा जारी की गई गाइडलाइन का पालन करना क्रशर संचालकों के नियम शर्तों में शामिल होता है परंतु सिंगरौली जिले में संचालित हो रहे क्रेशर प्लांट में नियमों को ताक में रखकर क्रसर प्लांट का संचालन किया जा रहा है और ऐसा आज से नहीं बल्कि काफी समय से यह सिलसिला जारी है खनिज विभाग के आदेश को नजरअंदाज कर क्रशर प्लांट संचालकों ने तार फेंसिंग नहीं की एवं अन्य कई महत्वपूर्ण गाइडलाइन का पालन भी नहीं किया जा रहा है सबसे बड़ा सवाल तो इन क्रशर प्लांट को संचालित करने वालों से

ज्यादा खनिज विभाग के जिम्मेदार अधिकारी की ही जिम्मेदारी बनती है। सिंगरौली जिला एक तरफ जहां अपने खनिज के उत्खनन के लिए जाना जाता है कई बिजली घरों को अपने अंदर संजोए हुए हैं तो वहीं दूसरी तरफ जिले में तेजी से फैल रहे प्रदूषण को लेकर जिम्मेदार खामोश बैठे हुए हैं हर वर्ष शासन के खजाने में हजारों करोड़ रुपए देने वाला यह जिला जिम्मेदारों की बेरुखी का शिकार बन रहा है।

जिले में 100 से अधिक खदानों से निकल रहा पत्थर

क्रेशर प्लांटों को गिट्टी तैयार करने के लिए स्टोन (पत्थर) उपलब्ध कराने वाले खनन कारोबारियों ने अधिक से अधिक कमाई करने के फेर में सुरक्षा जैसे मानकों को भी ताक पर रख दिया है। नियमों को ताक पर रखते हुए एक ओर जहां कारोबारियों ने निर्धारित मानक से कई गुना पत्थर निकालकर खदानों को भयावह स्थिति में पहुंचा दिया है। दूसरी ओर उनके द्वारा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम भी नहीं किए गए हैं। आलम यह है कि खदान में काम करने वाले कर्मचारियों की जान को हर पल खतरा बना रहता है। वर्तमान में यह हाल जिले की ज्यादातर खदानों का है। खनिज विभाग की माने तो इस समय जिले में 100 से अधिक खदानों से पत्थर निकाला जा रहा है। इनमें से करीब 50 फीसदी खदान ऐसी हैं, जिनमें अंधाधुंध खनन के चलते वह भयावह स्थिति में पहुंच गई है। स्थिति

यह है कि कुएं से भी अधिक गहरी हो चुकी खदानों में वाहनों के निकलने के लिए उचित प्रबंध नहीं हैं। पत्थरों से लोड वाहनों को खदान से निकलने के लिए मिट्टी का ढेर एकत्र कर रास्ते बना दिए हैं। चालक जानजोखिम रखकर खदान में से पत्थर लेकर बाहर निकलते हैं। इतना ही नहीं खदानों के चारों और सुरक्षा के मद्देनजर घेराबंदी जैसे निर्देशों को भी नजरअंदाज किया जा रहा है। इसके अलावा सुरक्षा के दूसरे निर्देश भी नजर अंदाज किए जा रहे हैं। यह बात और है कि वह खदानों की भयावह स्थिति में पहुंचने और सुरक्षा के मानकों का उचित पालन नहीं होने की बात पर जांच जारी है का हवाला दे रहे हैं।

सुरक्षा मानकों की हो रही अनदेखी

सिंगरौली जिले के मकरोहर में संचालित होने वाले क्रशर खदान से निकाले जा रहे पत्थरों पर तो संचालकों की नजर वर्षों से है एवं लगातार उत्खनन का कार्य भी बखूबी हो रहा है परंतु यदि हम संबंधित क्रेशर खदान में सुरक्षा मानकों की बात करें तो क्रशर संचालक के द्वारा सुरक्षा मानकों की अनदेखी बड़े पैमाने पर की गई है मुख्य सड़क से महज कुछ मीटर की दूरी पर स्थित खदान आज लगभग सैकड़ों मीटर गहरी हो चुकी है क्रेशर खदान संचालकों को खनिज विभाग के द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों में से एक खदान के चारों तरफ तार फेंसिंग भी अनिवार्यता की गई परंतु लगातार उत्खनन करने के कार्य में व्यस्त क्रेशर चालकों के द्वारा सुरक्षा के नाम पर तार फेंसिंग करना शायद रास नहीं आ रहा है इसके साथ ही नियमों का पालन कराने वाले जिम्मेदार अधिकारी भी इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं आपको बताते चलें कि खनिज विभाग ने सभी खदान संचालकों को खदान के आसपास तार फेंसिंग के निर्देश दिए हैं लेकिन चालकों ने इन निर्देशों पर कोई ध्यान नहीं दिया इतना ही नहीं जिले में स्थित बहुत सी खजाने ऐसी भी हैं जहां पर पत्थरों का उत्खनन तो किया जा चुका है परंतु संबंधित खदानों को खुले गड्डों के रूप में यूं ही छोड़ा जा चुका है। खदान सड़क से कम से कम 100 मीटर की दुरी पे होना चाहिए लेकिन यह नहीं है, खदान स्टेप बय स्टेप होना चाहिए लेकिन खदान संचालक सीधे खुदाई कर रहें है जिससे खदान ढह जाने का खतरा बना हुआ है इतना ही नहीं खुले तौर पर गहरी खदानें गांव वालो और मवेशियों के लिए खतरा बन चुकी है। सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किये गए है।

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